Aruna Roy Bunker Roy

सूचना का अधिकार, हक का हथियार अरुणा राय एवं बंकर राय

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हमें जानने का हक है, अरुणा राय का जन्म 26 जून 1946 को हुआ है। उन्हें भारतीय सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में हम सब जानते हैं। उन्होंने अपने पति संजीत बंकर राय के साथ मिलकर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सूचना के अधिकार को अपना हथियार बनाया। लोगों को संगठित किया। संघर्ष किया और देश में 2 अक्टूबर 2005 से सूचना के अधिकार अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अरुणा राय

भारत एक लोकतांत्रित गणतंत्र है। यहाँ अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र है अर्थात लोग सीधे नहीं, बल्कि लोगों के प्रतिनिधि विभिन्न स्तरों पर सत्ता का संचालन करते हैं। केन्द्रीय स्तर पर सरकार के तीन अंग हैं- कार्यपालिका, न्यायपालिक एवं व्यवस्थापिका । न्यायपालिका यानि की कोर्ट कचेहरी अपना सारा काम लिख-पढ़कर करती है, जिसे कोई भी कभी भी देख सकता है।

व्यवस्थापिका यानि हमारी संसद के सदन भी अपनी पूरी कार्यवाही लिखकर जनता के सामने प्रस्तुत करते हैं। किन्तु हमारा तीसरा अंग कार्यपालिका यानि सरकारी अफसर एवं बाबू अंग्रेजों के जमाने के एक अधिनियम (शासकीय गुप्त बात अधिनियम) का सहारा लेकर लोगों को जानकारी देने से मना करते थे। इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पनपता और फलता-फूलता था ।

अरुणा राय और बंकर राय

अरुणा राय और बंकर राय ने इस समस्या को समझा। उन्होंने विचार किया कि जबतक भारत के हर नागरिक को जानने का अधिकार नहीं होगा, तबतक हमारी प्रजातांत्रित स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं होगा। उनके विचार का बहुत विरोध हुआ, किन्तु उन्होंने मजदूर किसान शक्ति संगठन नाम के अपने संगठन के बल पर लोगों की सहभागिता प्राप्त की और सरकार पर सूचना का अधिकार अधिनियम बनाने का दबाव डाला।

अरुणा और बंकर राय के प्रयासों तथा बड़े पैमाने पर जनता और स्वयं सेवी संगठनों के सहयोग से यह सपना साकार हुआ। आज सूचना का अधिकार हर भारतीय के पास भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ने का एक सशक्त हथियार है।

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