Roopnath Bhutnath

भूतनाथ से रूपनाथ कैसे बने भगमान शिव शंकर | Bhuthnath se Roopnath Kaise Bane bhagman Shiv Shankar Story

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Bhuthnath se Roopnath : बहुत प्राचीन काल की बात है, जब भगवान शिव शंकर पूरे विश्व में भूतनाथ के नाम से जाने जाते थे। सभी लोग कहते हैं कालों के काल महाकाल है और भूतों के भूत भूतनाथ महादेव हैं, देवों के देव (देवादी देव) महादेव जिनका विराट रूप इतना विराट है, की सम्पूर्ण विश्व समाजाये।

भूतनाथ से रूपनाथ कैसे बने भगमान शिव शंकर :

ये कहानी एक छोटे से बच्चे की जो अपनी माँ के प्रति प्यार और पिता के प्रति विश्वास पर आधारित हैं। दुनिया के किशी भी कौने में आप किसी भी समुदाय या धर्म में जा कर देखें तो आपकों माँ और उसके बच्चे के प्रति प्यार बहुत जादा देखने को मिलेगा।

आपने एक पौराणिक कथा सुनी होगी इसमें देवी सती के बारे में पढ़ा भी होगा कि उनके पिता दक्ष प्रजापति अखिल ब्रह्मांड के राजा थे। उन्हें भगवान शिव शंकर का भूतनाथ रूप और उनके आजू-बाजू विचरण करते भूत-पिचासों की जोड़ी उन्हें नहीं भाती थी।

दक्ष प्रजापति ने जब यज्ञ किया तो देवादि देव महादेव को निमंत्रण नहीं दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि उनकी पुत्री देवी सती यज्ञ में बिना बुलाए पहुँच गयी । जब देवी सती ने अपने पति का अपमान होते हुए देखा और किसी रूप से वापस नहीं जा सकती थी। तो उन्होंने यज्ञ की अग्नि में समा गई और जब से आप सभी जानते हैं की भगमान शिव शंकर को ही भूतनाथ कहा जाता है।

अब बात आती है श्री गणेश जी हमेशा यही मनन किया करते थे कि यह जोड़ी कैसी है, कि मेरी माता संसार में सबसे अधिक सुंदर है और मेरे पिता भूतनाथ हैं। ये जोड़ी ठीक नहीं दिखती है क्या मेरे पिताजी दुनिया में इतने शक्तिशाली हैं क्या वे सुंदर रूप धारण नहीं कर सकतें हैं।

यही सोचकर श्री गणेश जी ने अपने पिता श्री भगवान शिव शंकर से प्रार्थना की हे पिताश्री आप से मेरी प्रार्थना है कि आप मेरी प्रार्थना को स्वीकार करेंगे। भागवान सब कुछ जानते थे और मुस्कुरा दिए।

कहो गणेश तुम्हारी हर प्रार्थना स्वीकार है और मैं स्वीकार नहीं करूंगा तो और कौन करेगा तुम्हारे मन में क्या है,
तो श्री गणेश जी ने हाथ जोड़कर कहा है पिताजी मेरी माता कितनी सुंदर है। पूरे संसार में सबसे अति सुंदर और आप कितने डरावने कितने विशाल और बड़े भूतों से दिखाई देते हो मुझे लगता है यह जोड़ी मुझे देखने में ठीक नहीं लगती तो क्या कृपया कर आप एक सुंदर रूप धारण कर ले।

महादेव जी ने गणेश जी की बाल रूप बातों को सुनकर मुस्कुराते हैं और वह जानते थे कि यह एक लीला है उन्होंने कहा ठीक है। उन्होंने तथास्तु कहा और भगवान शिव शंकर जो अब तक भूतनाथ रूप में थे वह बहुत ही सुंदर रूपनाथ रूप में परिवर्तित हुए इसी कारण उनका नाम रूपनाथ पड़ा।

भगवान शिव शंकर का इतना सुंदर रूप था कि भगवान विष्णु का मोहिनी रूप भी फीका पड़ गया। बहुत सुंदर रूप होने के कारण पार्वती से भी सुंदर दिखने लगा। गणेश जी को फिर एक चिंता सताने लगी जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है।

दुनिया का कोई भी छोटा बच्चा अपनी मां को सबसे संसार में सुंदर दिखता है। जैसे एक मां को अपना ही बचा दुनिया में सबसे सुंदर प्रतीत होता है। गणेश जी को चिंता में देखकर भगवान शिव शंकर मुस्कुराते हैं और बोलते हैं।

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पुत्र तुम्हारी कामना तो पूर्ण हो चुकी है तुम चिंतित क्यों दिखाई देते हो। अब गणेश जी ने हाथ जोड़कर कहा कि हे पिता श्री आप बहुत सुंदर है आपको में हमेशा सुन्दर देखना चाहता हूं परंतु अब मुझे अपनी मां के आलावा संसार में अपनी मां से अधिक किसी ओर को सुन्दर देखना नहीं चाहता। कृपया करके हे प्रभु आप अपने पुराने रूप में आ जाए ताकि मेरी मा ही संसार में सबसे सुन्दर रहे।

ताकि इस संसार में मेरी मां सबसे सुंदर दिखे बस मेरी यही कामना है। और यह कामना मेरी ही नहीं संसार के हर पुत्र की है कि उसकी माही सबसे सुंदर हो , भगवान शिव शंकर मुस्कुराते हैं और श्री गणेश जी को पुनः तथास्तु का वरदान देते हैं।

इस कहानी से हमें इस बात की शिक्षा मिलती हैं की एक छोटे का अपनी मां का प्यार को ही संसार में सबसे सुंदर मानता है दूसरी बात इस कहानी से हमें भगवान शिव शंकर के पहला नाम भूतनाथ और दूसरा नाम रूपनाथ के बारे में पता चला अगर आपने उसके बारे में और जानना चाहते हैं कृपया कर यहां पर क्लिक करें

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