Priceless Treasure

अनमोल खजाना

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प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल खजाना दिए हैं परंतु मानव जाति द्वारा इन अनमोल खजानो का अत्यधिक दोहन करने से आज यह हमसे दूर होने वाले हैं आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि वह कौन से अनमोल खजाना है कि जोर से हमें प्रकृति ने फ्री ही दिया है लेकिन अगर हम उसका इसी तरह दोहन करते रहेंगे तो एक दिन वह दूर नहीं कि मानव जाति के लिए जीवन तब और मरण तक की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
मानव जाति हमेशा कुछ ना कुछ पाने की इच्छा रखती है। मानव जाति को जितना भी ज्यादा दिया जाए वह भी कम है। आज मानव जाति के पास बहुत से ऐसे अनमोल खजाना है हार के रूप में दिया हुआ है।

  1. हवा
  2. मौसम
  3. पानी
  4. जंगल
  5. नदी
  6. समुद्र
  7. पर्वत
  8. ओजोन परत
  9. समय
  10. जीवन
  11. खाद्य श्रंखला
  12. पर्यावरण

हवा

आज हमारी पृथ्वी में हवा की एक अलग ही महत्व है। जब हवाएं चलती है तो मौसम में बदलाव होता है कहीं गर्मी होती है तो कहीं सर्दी होती है कहीं तो कहीं बरसात होती है। हवाएं ही है जो समुद्र से हमें पानी खींच कर ला कर देती हैं।

मौसम

अगर हमारी धरती पर मौसम में फेरबदल ना हो तो बारिश कैसे होगी सर्दी कैसे होगी कहीं पतझड़ तो कहीं गर्मी तो कहीं बरसात आज ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम बदल रहा है। जहां बारिश नहीं होती थी वहां बाढ़ आ रही है। रेगिस्तान में बाढ़ देखी जाती है। और जहां पानी हमेशा बसता था आज हो चुका है।

साल के कुछ महीने बारिश के होते थे तो कुशाल के कुछ महीने ठंडी और कुछ महीने में लगभग चला आ रहा था। पर हमारे द्वारा अत्यधिक पृथ्वी के वातावरण में खिलवाड़ किया गई पूर्ण वातावरण में इतना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद है। कि हर वर्ष पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है पूर्व गोलार्ध चल रही है।

अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले कुछ वर्षों बाद हमारे पृथ्वी का तापमान इतना ज्यादा बढ़ जाएगा कि सामान्य जीवन जीने लायक नहीं रहेगा। फसलें नष्ट हो जाएंगे भोजन संकला खत्म होने की कगार पर आ जाएगी।

पानी

जब पानी की बात हो तो बात ही क्या ? कहा ही जाता है जल ही जीवन है और जीवन ही चल है हमारी पृथ्वी पर जल से ही जीवन की उत्पत्ति हुई है।
मुझे एक कबीर दास जी का दोहा याद आता है। बिन पानी सब सून। पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिसमे मिला या हुसैन जैसा

जंगल

आज जंगल लगातार कट रहे हैं औद्योगिक करण और किसी के लिए इमारती लकड़ी के लिए तो विकास के लिए जंगल जिस गति से कट रहे हैं प्रतिवर्ष। आज प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में लगभग 1 वर्ग किलोमीटर जंगल प्रतिदिन काट दिए जाते हैं। हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही

जिसके कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है इस तापमान को कम करने के लिए सिर्फ एक ही उपाय है कि मैं कार्बन उत्सर्जन को कम करना पड़ेगा और जंगलों को क्षेत्रफल को बढ़ाना पड़ेगा। लेकिन औद्योगिक करण और स्वार्थ को देखकर विश्व के ज्यादातर देश इस बात पर सिर्फ बात करते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग ग्लोबल वार्मिंग पर कोई इस पर काम करना ही नहीं चाहता।

पृथ्वी में टर्न खतरे की घंटी का टाइम स्टार्ट हो गया अकाउंट स्टार्ट है सबको पता है बस लक्ष्य निर्धारण कर रहे हैं कि 2028 2032 2040 में जाकर हम कार्बन उत्सर्जन को कम कर देंगे लेकिन इससे क्या होगा जब तक तो बात ही बिगड़ चुकी रहेगी।

नदी

आज विश्व की ज्यादातर नदियों का पानी दूषित और गंदा होता जा रहा है कहीं पर नदियां सूख चुकी हैं तो कहीं पर नदियों नालों का रूप ले चुकी है आज दुनिया की लगभग 99% नदियों का पानी पिया ही नहीं जा सकता और दुनिया की 70% नदियों के पानी में आप नहाया ही नहीं नहीं जा सकता।

भारत देश दुनिया में अकेला था एक ऐसा देश है जहां नदियों को मां कहा जाता है और नदियों को पूजा भी जाता है। आज आप देख लो इस हाल में है नदियों को देख कर ही नहीं सकते यह एक पवित्र नदियां है जो इनकी संस्कृति और धर्म में एक विशेष दर्जा प्राप्त है और एक राष्ट्रीय धरोहर भी हैं।

गंगा को ही आप देख लीजिए आज गंगा की बदतर स्थिति किसने कि हम मानव ने अपने विकास के लिए अपने स्वार्थ के लिए और कुछ अज्ञानता बस जब भारत में लॉकडाउन चला भारत की सारी नदियां हो चुकी थी।

समुद्र

आज मानव अपने स्वार्थ के लिए समुद्र को भी नहीं छोड़ रहा आज समुद्री जीवन संकट में पढ़ा गया है हम इंसानों द्वारा एक इंसान ने प्लास्टिक का बेतहाशा इस्तेमाल किया है और प्लास्टिक जो अब समुद्र में हर जगह मौजूद है समुद्री जीवन में बहुत सी प्रजातियां विलुप्त हो चुके हैं और मछलियां के पेट में प्लास्टिक आपको मिलेगा या प्लास्टिक पूरे समुद्री जीवन की परिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है वह दिन दूर नहीं जब इसका मानव पर भी असर शुरू होने वाला है।

Underwater Environmental pollution
Underwater Environmental pollution

पर्वत

पर्यावरण की बात हो और पर्वतों के पर वातावरण की बात ना होए हो ही नहीं सकता आज ज्यादातर पर्यावरण मानव द्वारा अनावश्यक दखल के कारण अपने अस्तित्व से लड़ रहे हैं वह से पर्यावरण विदों का कहना है कि पर्वतों का दोहन मानव जाति के लिए एक सबसे बड़ी भूल में से साबित होगी।

ओजोन परत

आज पूरी दुनिया कितने बैठकों पर बैठक कर रहे हैं ओजोन लेयर पतली होती जा रही है कहीं-कहीं ओजोन लेयर में दो छेद भी हो गया है और इसी छेद के कारण आज कैंसर के मरीजों के प्रतिशत बढ़ता जा रहा है बहुत से जीव जंतु प्लूटो की कगार पर हो चुके हैं आने वाले कुछ सालों में यह ओजोन लेयर के छेद और भी बड़ा हो जाएगा और हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हम बहुत कुछ होने वाले जीवन को बहुत बड़ा संकट है

समय

समय की धारा को कभी मोड़ा नहीं जा सकता, खोया समय कभी पाया नहीं जा सकता, समय इतना अमूल्य है कैसे खरीदा नहीं जा सकता। मानव का अस्तित्व और मानव की सारी गतिविधियों इसी समय चक्र के अधीन है। समय किसी के लिए रुकता नहीं है समय किसी के लिए झुकता नहीं

जीवन

पृथ्वी पर जीवन प्रकृति द्वारा प्रदान किया गया एक विशेष तोहफा है। आज मानव ने विज्ञान की दुनिया में बहुत आगे तक प्रगति कर ली है आज हम अपने ही ब्रह्मांड नहीं अनंत ब्रह्मांड उत्तर झांक सकते हैं। आज मानव में ऐसा खोज रहा है क्या पृथ्वी के अलावा किस कहीं और जीवन है क्या कहीं और एलियन लाइफ मौजूद है।


परंतु इतनी खोज पर इतना समय और पैसा लगाने के बावजूद भी हमें ऐसा अभी तक कोई भी ग्रह नहीं मिला है जहां पर पृथ्वी के अलावा जीवन मौजूद है। प्रकृति ने कितनी दूरी पर रखा है जहां ज्यादा गर्मी है ज्यादा सर्दी है। आज हमारे पृथ्वी पर मौसम परिवर्तित होते हैं और भी बहुत कुछ परंतु हम मानव ने अपने निजी स्वार्थों के लिए इस पृथ्वी के जीवन को संकट में डाल दिया।


अपने विकास के लिए पृथ्वी के बहुत सारे जीव जंतुओं के जीवन को अंत कर दिया आज पृथ्वी में बहुत से ऐसे जीव हैं जिन्हें हम किताबों में या फिर म्यूजियम में उनके अवशेषों को देख सकते हैं बहुत से जीवन परिस्थितियों के कारण इस पृथ्वी पर खत्म हो गया लेकिन ज्यादातर जीवन को हम मानव द्वारा ही खत्म किया गया है अपने निजी स्वार्थों के कारण।

खाद्य श्रंखला

पृथ्वी पर जीवन को मौजूद रहने के लिए खाद्य श्रंखला का यथावत बने रहना अति आवश्यक है। फूड चेन किसी भी प्रकार से टूटती है तो शायद पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा करना पड़ेगा।

पर्यावरण

पर्यावरण पर हमारी शिक्षा दीक्षा को होती है। पर्यावरण दिवस मनाया जाता है सारे संसार में, खूब मीडिया वाले खूब बैठकर किए जाते हैं पर्यावरण बचाने के लिए, पर्यावरण के बहुत सारे नारे बहुत सारी बातें बहुत सारे विद्वानों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर चर्चा की जाती है।

Environmental pollution
Environmental pollution

परंतु क्या पर्यावरण बचाना इतना भी मुश्किल है, या फिर कोई बचाना ही नहीं चाहता, सभी को अपने फायदे और नुकसान की पड़ी है पर्यावरण की नहीं। आज विकासशील देश और विकसित देशों द्वारा पर्यावरण किया जा रहा है ।

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